Monday, October 18

बिहार में अब व्हाइट फं’गस की एंट्री, ब्लैक फंगस से है कई गुणा ख़’तरनाक, म’चा ह’ड़कं’प

पटना : बिहार में अब ब्लैक फं’गस के बाद व्हाइट फं’गस की भी एंट्री हो गई है। सूबे में अब व्हाइट फंगस के भी मरीज मिलने लगे हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में ह’ड़कं’प म’च गया है। PMCH में इसके 4 मरीज पाए गये हैं। ब्लैक फंगस की तुलना में व्हाइट फंगस को अधिक ख़’तरनाक बताया गया है। ।

क्या है व्हाइट फंगस

व्हाइट फंगस को मेडिकल टर्म में ‘कैंडिडोसिस’ भी कहते हैं। ये बेहद ख’तरनाक है। व्हाइट फंगस फेफड़ों के संक्रमण का मुख्य कारण है। इसका अटसर सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं पड़ता। ये बीटमारी फेफड़ों के साथ-साथ त्वचा, मुंह के अंदर के भाग, किडनी, आंत, ब्रेन, प्राइवेट पार्ट्स और नाखून को भी संटक्रमित कर सकता है। इलाज में देर हुई तो फिर मरीजों की जान पर गंभीर संटकट खड़ा हो जाता है। 

PMCH के चिकित्सक की पुष्टि

इस संबंध में PMCH के माइक्रोब़ायोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एस. एन. सिंह ने बताया कि उनके संस्थान में ऐसे 4 म’रीज मिल चुके हैं, जो व्हाइट फंगस के शि’कार थे। उनमें कोरोना जैसे ल’क्षण थे लेकिन वे कोरोना पॉजिटिव नहीं थे। इन मरीजों का रैपिड एंटीजन टेस्ट, RT-PCR और एंटीबॉडी टेस्ट किया गया तो वे कोरोना निगेटिव पाए गए लेकिन फेफड़ा संक्रमित था। जां’च-प’ड़ताल के बाद उन्हें जब एंटी फंगल दवा दी गयी तो वे ठीक हो गये। 

व्हाइट फंगल का शि’कार बनने वालों में पटना के बड़े सर्जन भी शामिल हैं। उन्हें कोरोना जैसे लक्षण के बाद एक निजी अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो गया था लेकिन जब जां’च हुई औऱ उन्हें एंटी फंगल दवा दी गयी तो ऑक्सीजन लेवल सुधर कर 95 हो गया।

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