रांची : झारखण्ड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का नि’धन हो गया है। वे कोरोना को मा’त देने के बाद जिंदगी की जं’ग हा’र गये। झामुमो के वरिष्ठ मंत्री के नि’धन के बाद सियासी जगत में शो’क की लहर दौ’ड़ गयी है। उन्होंने रांची के मेदांता अस्पताल में आ’खिरी सां’स ली।

जिं’दगी की जं’ग हा’र गये हाजी हुसैन

विदित है कि हाजी हुसैन अंसारी 23 सितंबर को कोरोना संक्रमित होने के बाद रांची के मेदांता अस्पताल में भ’र्ती हुए थे। हालांकि शुक्रवार को उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गयी थी लेकिन फिर भी उन्हें सां’स लेने में त’कली’फ हो रही थी और उनकी स्थिति गं’भी’र बनी हुई थी। हालांकि लोगों को ये उम्मीद थी कि कोरोना को ह’राने के बाद वे ये भी जं’ग जीत जाएंगे लेकिन ये हो न सका और का’र्डियक अ’रेस्ट के बाद 72 वर्षीय हाजी हुसैन अंसारी की मौ’त हो गयी।

सांस लेने में हो रही थी त’कली’फ

वे हा’र्ट के साथ-साथ डायबिटीज के भी मरीज थे। इन बी’मारि’यों से ल’ड़ने वाले हाजी हुसैन अंसारी को कोरोना भी हो गया था। चिकित्सकों की माने तो उनका कोरोना संक्रमण फेफड़े तक पहुंच गया था। फिलहाल उनके नि’धन की खबर सामने आने के बाद सियासी गलियारे में मा’त’म प’सर गया है। 

सियासी गलियारे में शो’क

उनके नि’धन की सूचना मिलते ही झामुमो के कई नेता, कार्यकर्ता मेदांता अस्पताल पहुंच गए। मंत्री मिथिलेश ठाकुर, झामुमो के महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य भी मेदांता अस्पताल पहुंचकर उनके बेटे और परिवार के सदस्यों, शुभचिंतकों को दिलासा दिलाया। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी हाजी हुसैन अंसारी के नि’धन पर ग’हरा शो’क प्र’कट किया है।

गुरुजी के थे विश्वासपात्र

आपको बता दें कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी झारखण्ड के मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से चार मर्तबा विधायक चुने गये थे। इसके साथ ही उन्हें चार बार मंत्री बनने का मौका मिला। साल 1995 में पहली बार वे विधायक चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 2000, 2009 और 2019 के विधानसभा चुनाव में भी मधुपुर से जीत हासिल की थी। वे शिबू सोरेन के विश्वासपात्र नेताओं में शुमार थे।

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