Monday, October 18

कोरोना से मौ’त मामले में केन्द्र सरकार ने 4 लाख मुआवजा देने में जतायी असमर्थता, बतायी ये बड़ी वजह

नई दिल्ली : कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इस वैश्विक महामारी से म’रने वाले सभी लोगों के परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा देने में केन्द्र सरकार ने असमर्थता जतायी है और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्पष्ट कहा है कि अगर प्रत्येक मौ’त के लिए 4 लाख रुपये का भुगतान हुआ तो फिर प्रदेश सरकारों के पास स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड यानी SDRF का पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केन्द्र ने बताया ये बड़ा कारण

इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने ये भी कहा है कि पूरा फंड खत्म होने के बाद कोरोना से निपटने की तैयारी के साथ ही बाढ़, चक्रवात और बड़ी-बड़ी आपदाओं से लड़ पाना मुमकिन नहीं हो पाएगा। केन्द्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि इस वित्तीय वर्ष में प्रदेशों को 22 हजार 184 करोड़ रुपये SDRF में दिए गये हैं। इसका एक बड़ा हिस्सा वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में खर्च हो रहा है।

इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने 1.75 लाख करोड़ का प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज भी घोषित किया है लिहाजा वैश्विक महामारी कोरोना से हुई 3 लाख 85 हजार मौतों के लिए 4-4 लाख रुपये का भुगतना करना काफी कठिन होगा। अगर प्रदेश सरकारों को इसके लिए बाध्य किया गया तो कई काम काफी प्रभावित होंगे।

ये है पूरा मा’मला

विदित है कि सुप्रीम कोर्ट में दो अधिवक्ताओं गौरव कुमार बंस और दीपक कंसल की तरफ से याचिका दाखिल की गई है और बताया गया है कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 12 के तहत आपदा से मरने वालों के लिए सरकारी मुआवजे का प्रावधान है।

इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि पिछले साल केन्द्र सरकार ने सभी प्रदेशों को कोविड-19 से मरने वाले लोगों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए कहा था लेकिन इस साल क्यों नहीं? याचिकाकर्ता ने ये भी कहा है कि हॉस्पिटल से मृतकों को सीधा अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है। उनका पोस्टमॉर्टम भी नहीं होता है और न ही डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाता है कि उनकी मौत कोरोना से हुई है लिहाजा अगर मुआवजा मिलता है तो उनका परिवार इसका लाभ नहीं ले सकेगा।

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