न्यूज डेस्क : भू’त या प्रे’त के बारे में अक्सर कई कहानियां सुनी जाती हैं। हालांकि इस पर कई लोग विश्वास करते हैं तो कई लोग इसे बे’कार की बातें कहकर टा’ल जाते हैं लेकिन कुछ महान शख्सियतों ने इस पर भरोसा जताते हुए अपनी आ’पबीती भी सुनाई है,जो काफी दिलचस्प है।

लालू का हुआ भू’तों से सामना!

जी हां, कुछ ऐसा ही वाकया हो चुका है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकप्रिय नेता लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के साथ। इस दिलचस्प कहानी के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता होगा लेकिन आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं, जरा ध्यान से पढ़िएगा।

दरअसल, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद (RJD Supremo Lalu Prasad Yadav) की माने तो एक मर्तबा उनका भी भू’तों से सामना हो चुका है। लालू प्रसाद के मुताबिक ये पूरी कहानी उस वक्त की है, जब वे छोटे थे और अपने गांव गोपालगंज के फुलवरिया (Phulwaria in Gopalganj) में अपने माता-पिता के साथ रहते थे। लालू प्रसाद की माने तो उनके पिता तीन भाई थे। उनके एक भाई सूधन राय संन्यासी बन गये थे और शादी नहीं की थी। वह काली माई और स्थानीय देवता ब्रह्म बाबा (बरम) बाबा की पूजा करते थे और लोगों के शरीर में प्रवेश कर गये भू’तों को भ’गाते थे। जब कभी परिवार के लोग भात और मछली की बात करते थे तो वे ना’राज हो जाते थे।

रों’गटे खड़े कर देने वाली कहानी

लालू प्रसाद (Lalu prasad) के मुताबिक एकबार उनका भी सामना भू’तों से हो गया। वह गर्मियों की चमकदार पूर्णिमा की रात थी। घर के पीछे बड़े से पीपल के पेड़ के नीचे बरम बाबा का अपना ठिकाना था। गांव के एक काका भोजपुरी लोकप्रेम कथा यानी सोरठी बिरिजभार गा रहे थे और बरम बाबा के डेरे में रात्रिभोज के बाद घेरे में बैठकर लोग उन्हें सुन रहे थे।। श्रोताओं में लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) भी शामिल थे। उन्हें चैता, बिरहा, होली, सोरठी और अन्य लोकगीत सुनना काफी अच्छा लगता है और आज भी इसे बड़े चाव से सुनते हैं।

लालू प्रसाद की माने तो … उस रात वहीं बरम बाबा के नजदीक गेहूं के पुआल के ढेर में नींद लग गई और पता ही नहीं चला कि कब काका ने गाना बंद कर दिया और सभी गांव वाले अपने-अपने घर चले गये। ..तभी, आधी रात के बाद अचानक दो लड़कों ने दोस्त का स्वां’ग भरकर लालू प्रसाद को जगाया और अपने साथ आने के लिए उकसाया। लालू प्रसाद की माने तो वे नींद में थे और कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।

वे गांव के बाहर स्थित श्म’शान घा’ट की ओर बढ़ रहे थे और लालू प्रसाद आंखें म’लते हुए उनके पीछे-पीछे जा रहे थे। कुछ दूर चलने के बाद लालू प्रसाद लघुशं’का (पे’शाब) के लिए खेत में ही बैठ गये। तब तक वो दोनों लड़के उनके पास ही खड़े थे और उनके सिर और चेहरे ढंके हुए थे। …वे जब पे’शाब कर रहे थे, उसी वक्त गांव के एक बुजुर्ग, जिन्हें तपेसर बाबा के नाम से जाना जाता था, वे अपनी हथेलियों पर खै’नी र’गड़ते हुए वहां से गुजरे और भोजपुरी में पूछा – कौन ह रे?

तभी लालू प्रसाद ने तपाक से जवाब दिया – हम हई ललुआ। इसके बाद तपेसर बाबा ने फिर पूछा कि तुम कहां जा रहे हो? उठो और घर जाओ।‘ जैसे ही तपेसर बाबा ने निर्देश देने के अंदाज में कहा कि दोनों लड़के वहां से भा’ग गये। इसके बाद लालू प्रसाद भी घर लौट आए। ..अगले दिन सुबह जब वे उन दोनों दोस्तों के पास गये, जो उन्हें श्म’शान घा’ट ले जा रहे थे और उनसे पूरा मा’जरा पूछा तो उन्होंने हैरान करने वाला दावा किया कि वे तो रात में अपने घरों में सो रहे थे।

’रेशान लालू ने मां को बतायी सारी बात

यह सुनकर लालू प्रसाद भौं’चक्के रह गये और तुरंत तपेसर बाबा के घर पहुंचे तो उन्होंने भी कहा कि रात में वे जिस जगह पर मिले थे, वहां वह गये ही नहीं थे। उन्होंने बताया कि वे घर पर सो रहे थे। तपेसर बाबा के इतना कहने के बाद लालू प्रसाद का दिमाग च’करा गया और भागे-भागे जाकर उन्होंने अपनी मां को सारी बात बताई। इसे सुनने के बाद उनकी मां ने राहत भरी सां’स लेते हुए कहा कि जो लोग तुम्हारे दोस्तों का स्वां’ग भरकर आए थे, वे भू’त थे। बरम बाबा ने तपेसर बाबा का रूप धारण कर तुम्हें बचा लिया।

मेरे बेटे! बरम बाबा ने तुम्हें भू’तों से बचाया है वरना वे तुम्हें श्म’शान घा’ट ले जाकर मा’र भी सकते थे। इसके बाद मां ने लालू प्रसाद को बरम बाबा की पूजा करने की सलाह दी लिहाजा आज भी जब कभी लालू प्रसाद अपने गांव जाते हैं तो बरम बाबा के सामने सिर झुकाए बिना आगे नहीं बढ़ते। 

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